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ArticleFinance and GST · All GST-registered businesses

हर महीने GSTR-2B का मिलान करके पूरा इनपुट टैक्स क्रेडिट लेना

इनपुट टैक्स क्रेडिट केवल उन्हीं इनवॉइस पर मिलता है जिन्हें सप्लायर ने रिपोर्ट किया है और जो GSTR-2B में दिखते हैं। अगर हर महीने 14 तारीख को मिलान शुरू हो, हर बिल को मेल खाते, अंतर वाले या गायब बिलों की सूची में रखा जाए और सप्लायरों से फॉलो-अप जोखिम में पड़े क्रेडिट के क्रम में हो, तो कारोबार GSTR-3B की ड्यू डेट तक अपना पूरा क्रेडिट ले सकता है।

By Code Colonies12 min read
Medium and large businessesFinance controller · Accounts team

यह अंग्रेज़ी मूल से अनुवाद है। संदर्भ के लिए अंग्रेज़ी संस्करण ही मान्य है। अंग्रेज़ी में पढ़ें

सारांश

कोई भी कारोबार इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) केवल उन्हीं इनवॉइस पर ले सकता है जिन्हें उसके सप्लायरों ने रिपोर्ट किया है और जो उसके GSTR-2B में दिखते हैं। क्रेडिट तब अटकता या डूबता है जब बिल खरीद रजिस्टर (purchase register) में तो होते हैं पर स्टेटमेंट में नहीं, जब रकम में अंतर होता है, या जब मिलान इतनी देर से शुरू होता है कि GSTR-3B की ड्यू डेट से पहले सप्लायरों से बात ही नहीं हो पाती। हर महीने का एक तय तरीका, जो GSTR-2B बनने के दिन ही शुरू हो, हर बिल को तीन सूचियों में बांटे और सप्लायरों से उनके पास अटके क्रेडिट के क्रम में फॉलो-अप करे, कारोबार को पूरा क्रेडिट समय पर लेने देता है।

01क्रेडिट तय करने वाले नियम

केवल वही, जो सप्लायर ने रिपोर्ट किया। 1 जनवरी 2022 से Central Goods and Services Tax Act, 2017 (केंद्रीय माल और सेवा कर अधिनियम, आगे CGST Act) की धारा 16(2)(aa) के तहत किसी इनवॉइस पर क्रेडिट तभी मिलता है जब सप्लायर ने उसका ब्योरा GSTR-1 में भरा हो और वह खरीदार तक पहुंचा हो। CGST Rules का नियम 36(4) क्रेडिट को उतने तक सीमित करता है जितना GSTR-2B में दिखता है।

बाकी शर्तें भी लागू रहती हैं। धारा 16(2) के तहत खरीदार के पास टैक्स इनवॉइस होना चाहिए, माल या सेवा उसे मिल चुकी हो, टैक्स सरकार को जमा हो चुका हो और खरीदार ने धारा 39 के तहत अपना रिटर्न भर दिया हो।

सप्लायर को 180 दिन के भीतर भुगतान। धारा 16(2) के दूसरे परंतुक और नियम 37 के तहत, जिस बिल का भुगतान इनवॉइस की तारीख से 180 दिन के भीतर सप्लायर को नहीं हुआ, उस पर लिया गया क्रेडिट ब्याज सहित रिवर्स करना होता है। भुगतान हो जाने पर इसे दोबारा क्लेम किया जा सकता है।

सप्लायर का GSTR-3B भरना भी जरूरी। नियम 37A के तहत, अगर सप्लायर ने उस अवधि का GSTR-3B अगले वित्त वर्ष की 30 सितंबर तक नहीं भरा, तो खरीदार को उसी वर्ष की 30 नवंबर तक क्रेडिट रिवर्स करना होता है। सप्लायर के रिटर्न भरने पर इसे दोबारा क्लेम किया जा सकता है।

समय-सीमा। धारा 16(4) के तहत किसी वित्त वर्ष का क्रेडिट अगले वर्ष की 30 नवंबर या वार्षिक रिटर्न भरने की तारीख, इनमें से जो पहले हो, तक क्लेम करना होता है।

गलत क्लेम पर ब्याज। गलत तरीके से लिए और इस्तेमाल किए गए क्रेडिट पर धारा 50(3) के तहत ब्याज लगता है, जिसकी अधिसूचित दर 18 प्रतिशत सालाना है।

02महीने का टाइमटेबल

तारीखक्या होता है
11 तारीखसप्लायर पिछले महीने का GSTR-1 भरते हैं (मासिक रिटर्न भरने वाले)
14 तारीख तकइनवॉइस मैनेजमेंट सिस्टम (IMS) में सप्लायरों के दस्तावेज जैसे-जैसे भरे जाते हैं, दिखते जाते हैं; खरीदार उन्हें स्वीकार, अस्वीकार या पेंडिंग रख सकता है
14 तारीखपिछले महीने का GSTR-2B बनता है, जिसमें IMS में की गई कार्रवाई शामिल होती है; जिन दस्तावेजों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई, उन्हें स्वीकार माना जाता है
14 से 20 तारीखखरीदार मिलान करता है, जरूरत हो तो IMS में और कार्रवाई करता है और GSTR-2B दोबारा कंप्यूट (recompute) करता है
20 तारीखमासिक रिटर्न भरने वालों के लिए GSTR-3B की ड्यू डेट; क्रेडिट GSTR-2B से अपने आप भर जाता है

IMS को GST पोर्टल पर अक्टूबर 2024 में शुरू किया गया था। अक्टूबर 2025 की टैक्स अवधि से GSTN की एडवाइजरी यह सीमित करती हैं कि कोई दस्तावेज कितने समय तक पेंडिंग रखा जा सकता है। 17 अक्टूबर 2025 की एडवाइजरी नंबर 631 ने क्रेडिट नोट को एक टैक्स अवधि तक पेंडिंग रखने की अनुमति दी और यह सुविधा दी कि क्रेडिट नोट स्वीकार करते समय खरीदार उतना ही क्रेडिट बताए जितना वास्तव में रिवर्स करना है। क्रेडिट पहले की तरह GSTR-2B से GSTR-3B में ही जाता है।

समय पर दो और बातों का असर पड़ता है। जिस खरीदार का पिछला GSTR-3B अभी बाकी है, उसका GSTR-2B नहीं बनता; वह रिटर्न भरने के बाद ही कंप्यूट होता है। और QRMP स्कीम के तहत तिमाही रिटर्न भरने वाले सप्लायर के इनवॉइस खरीदार के GSTR-2B में तभी आते हैं जब सप्लायर तिमाही के पहले या दूसरे महीने की 13 तारीख तक इनवॉइस फर्निशिंग फैसिलिटी (IFF) भरे, या अपना तिमाही GSTR-1 भरे।

03तीन सूचियों में मिलान

खरीद रजिस्टर के हर बिल को सप्लायर के GSTIN, इनवॉइस नंबर और तारीख के आधार पर GSTR-2B के किसी दस्तावेज से मिलाएं, फिर कर योग्य मूल्य (taxable value) और टैक्स की तुलना करें। हर बिल इन तीन में से किसी एक सूची में जाएगा।

मेल खाते बिल

GSTIN, इनवॉइस नंबर, तारीख और रकम थोड़ी-बहुत छूट (tolerance) के भीतर मेल खाते हैं। इन्हें IMS में स्वीकार करें। क्लेम करने से पहले धारा 17(5) के तहत ब्लॉक्ड क्रेडिट हटा दें, जैसे ज्यादातर मोटर वाहनों पर, खाने-पीने की चीजों पर और अचल संपत्ति के वर्क्स कॉन्ट्रैक्ट पर। जहां इनपुट या कैपिटल गुड्स छूट-प्राप्त (exempt) सप्लाई में भी काम आते हैं, वहां नियम 42 और 43 के तहत जरूरी हिस्सा रिवर्स करें। जो माल महीने के अंत तक नहीं पहुंचा, उसका क्रेडिट रोक कर रखें। ये सब GSTR-3B की तालिका 4(B) में जाते हैं।

अंतर वाले बिल

दस्तावेज GSTR-2B में है, पर कोई बात मेल नहीं खाती।

अंतरआम वजहक्या करें
इनवॉइस नंबर में मामूली फर्कशुरुआती शून्य, प्रीफिक्स या स्लैश अलग ढंग से टाइप हुएअगर इनवॉइस वही है तो रजिस्टर सुधारें
कर योग्य मूल्य या टैक्स में फर्ककिसी एक पक्ष ने गलत दर लगाई, या भाड़ा सिर्फ एक तरफ जोड़ा गयासप्लायर से संशोधन (amendment) करवाएं या एंट्री सुधारें
टैक्स का प्रकार गलतसप्लायर ने राज्य के भीतर की सप्लाई पर IGST लगाया, या इसका उल्टासप्लायर को क्रेडिट नोट और नया इनवॉइस जारी करना होगा
प्लेस ऑफ सप्लाई गलतसप्लायर ने गलत राज्य रिपोर्ट कियासप्लायर GSTR-1 में संशोधन करे
सप्लायर ने अपना कोई दूसरा GSTIN इस्तेमाल कियासप्लायर ने किसी दूसरे राज्य के रजिस्ट्रेशन से बिल बनायारजिस्टर में वही GSTIN दर्ज करें जो इनवॉइस पर है
सप्लायर ने खरीदार के किसी दूसरे GSTIN पर बिल बनायाइनवॉइस पर खरीदार का गलत रजिस्ट्रेशनक्रेडिट उसी GSTIN का है; अगर इनवॉइस इसी GSTIN के लिए था तो सप्लायर से GSTR-1 में संशोधन करवाएं

गायब बिल

बिल रजिस्टर में है पर GSTR-2B में नहीं। सप्लायर ने रिटर्न नहीं भरा, देर से भरा, वह तिमाही रिटर्न भरता है, या उसने इनवॉइस किसी दूसरे GSTIN पर रिपोर्ट कर दिया। इस महीने यह क्रेडिट क्लेम नहीं हो सकता। सप्लायर के रिटर्न भरने पर यह बाद के किसी GSTR-2B में आ जाएगा और तब क्लेम किया जा सकेगा, बशर्ते यह धारा 16(4) की समय-सीमा के भीतर हो।

इसका उल्टा भी होता है: GSTR-2B में कोई दस्तावेज दिखता है जिसका बिल रजिस्टर में नहीं है। या तो बिल अकाउंट्स तक पहुंचा ही नहीं, या दस्तावेज असली नहीं है। बिल ढूंढें, या IMS में दस्तावेज अस्वीकार करें।

04जोखिम में पड़े क्रेडिट के क्रम में सप्लायरों से फॉलो-अप

गायब बिलों की सूची को सप्लायर के हिसाब से छांटें और हर सप्लायर के पास अटके क्रेडिट का जोड़ निकालें। जिन सप्लायरों के पास सबसे ज्यादा क्रेडिट अटका है, वे सबसे ऊपर आएंगे। इस तरह पहले फोन वहीं जाते हैं जहां पैसा है, और इनवॉइस नंबर व रकम हाथ में रहती है।

जो सप्लायर हर महीने देर से रिटर्न भरते हैं, उनके मामले में, अगर खरीद की शर्तें इजाजत देती हों, तो इनवॉइस GSTR-2B में आने तक भुगतान का एक हिस्सा रोक कर रखें, और देर से रिटर्न भरने की बात सप्लायर की रेटिंग में दर्ज करें। अगर सप्लायर सूक्ष्म या लघु उद्यम (micro or small enterprise) है, तो MSMED Act की धारा 15 के तहत 45 दिन की भुगतान सीमा और ऐसे सप्लायरों को देर से भुगतान पर इनकम टैक्स में खर्च की नामंजूरी (disallowance) अब भी लागू रहती है।

कितना दांव पर है, एक उदाहरण से। मान लीजिए किसी कारोबार की हर महीने ₹2 करोड़ की खरीद 18 प्रतिशत GST पर होती है, यानी ₹36 लाख का क्रेडिट। अगर 14 तारीख को उस क्रेडिट के 5 प्रतिशत वाले बिल गायब हैं, तो इस महीने ₹1.8 लाख का क्रेडिट सप्लायरों के भरोसे अटका है। दोनों प्रतिशत अनुमान हैं; अपने रजिस्टर के आंकड़े लगाएं।

05गलतियां जिनसे क्रेडिट डूबता है

18 तारीख को शुरुआत।
दो दिन में किसी से फॉलो-अप नहीं हो पाता। 14 तारीख को शुरू करें।
IMS में सब कुछ अपने आप स्वीकार होने देना।
जिस दस्तावेज पर कोई कार्रवाई नहीं हुई, उसे स्वीकार माना जाता है। तब कोई गलत या फर्जी इनवॉइस GSTR-2B में और फिर क्लेम में चला जाता है।
दोबारा कंप्यूट करना भूल जाना।
14 तारीख के बाद IMS में की गई कार्रवाई का असर क्रेडिट पर तभी पड़ता है जब GSTR-3B भरने से पहले GSTR-2B दोबारा कंप्यूट किया जाए।
180 दिन के नियम पर नजर न रखना।
180 दिन बाद भी जिस बिल का भुगतान नहीं हुआ, उसका क्रेडिट रिवर्स करना होता है। सप्लायर भुगतान की ड्यू सूची को क्रेडिट सूची के साथ रखें।
दोबारा क्लेम का हिसाब खो देना।
अस्थायी रिवर्सल GSTR-3B की तालिका 4(B)(2) में दिखाएं। पोर्टल इन्हें इलेक्ट्रॉनिक क्रेडिट रिवर्सल एंड री-क्लेम्ड स्टेटमेंट में ट्रैक करता है, जो अगस्त 2023 की टैक्स अवधि से उपलब्ध है, और तालिका 4(D)(1) में दोबारा क्लेम उसके बैलेंस से ज्यादा नहीं हो सकता। अपनी अलग सूची भी इनवॉइस के हिसाब से रखें, ताकि पता रहे कि किस सप्लायर के रिटर्न भरने से कौन-सी रकम खुलेगी।
GSTR-2B से ज्यादा क्लेम करना।
अगर GSTR-3B में क्लेम किया गया क्रेडिट नियम 88D में तय सीमा से ज्यादा GSTR-2B से अधिक है, तो पोर्टल फॉर्म DRC-01C में सूचना भेजता है, और कारोबार को सात दिन के भीतर अंतर की रकम जमा करनी होती है या उसका कारण बताना होता है।

06MatruOS में यह काम कैसे होता है

GSTR-2B लाकर मिलान। GST पोर्टल से JSON या Excel में डाउनलोड की गई GSTR-2B फाइल Accounts सेक्शन में लाई जाती है और खरीद बिलों से मिलाई जाती है। स्क्रीन पर दिखता है कि कानूनन कितना क्रेडिट मिल सकता है, किन दस्तावेजों में अंतर है, कौन-से बिल सप्लायरों ने रिपोर्ट नहीं किए (हर सप्लायर को भेजने के लिए तैयार नोट के साथ), और हर दस्तावेज पर पोर्टल में IMS का कौन-सा फैसला लेना है।

सुधार और दोबारा मिलान। कोई व्यक्ति किसी दस्तावेज को दूसरे बिल से जोड़ सकता है, गलत मिलान हटा सकता है, पोर्टल पर लिया गया IMS फैसला दर्ज कर सकता है और सुधार के बाद मिलान दोबारा चला सकता है।

बिल आते ही दर्ज। ईमेल या WhatsApp से फॉरवर्ड किए गए, या फाइल या फोटो के रूप में अपलोड किए गए सप्लायर बिल पढ़े जाते हैं और खरीद एंट्री के रूप में तैयार होते हैं, जिन्हें कोई व्यक्ति कन्फर्म करता है। इस तरह GSTR-2B बनने से पहले ही बिल रजिस्टर में होते हैं।

AI से गलती हो सकती है। ईमेल, WhatsApp या फोटो से पढ़े गए बिल हमेशा किसी व्यक्ति के कन्फर्म करने का इंतजार करते हैं। AI सदस्यों की बाकी खरीद एंट्री तब तक व्यक्ति का इंतजार करती हैं जब तक बुककीपिंग Ask me पर सेट है। पोर्टल पर IMS कार्रवाई करने से पहले मिलान जांच लें।

स्रोत

31 अक्टूबर 2026 को जांचे गए।

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